Tuesday, September 5, 2023

پہلو میں اپنے یار کے بیٹھے رہیں گے رات بھر 
اُس نازنیں کی گفتگو کو ہم سنیں گے رات بھر 

گر آپ ہم سے بے سبب روٹھے رہیں گے رات بھر 
تو دیدۂ نمناک سے آنسو بہیں گے رات بھر

تجھ سے بچھڑ کر جانِ جاں آہیں بھریں گے رات بھر
دردِ فراقِ یار میں رویا کریں گے رات بھر 

اربابِ دل شمعِ الم روشن رکھیں گے رات بھر 
بربادئ عشاق کا قصہ کہیں گے رات بھر

ہم کو بہ فضلِ ایزدی گر اک شبِ قربت ملی  
تو آپ کے رخسار و لب کے بوسے لیں گے رات بھر 

ہمراہِ مرگِ ناگہاں سوئے عدم چلتے ہیں ہم
آرام فرمانے کو دنیا میں رکیں گے رات بھر


पहलू में अपने यार के बैठे रहेंगे रात भर
उस नाज़नीं की गुफ़्तगु को हम सुनेंगे रात भर

गर आप हम से बे-सबब रूठे रहेंगे रात भर
तो दीदा-ए-नमनाक से आँसू बहेंगे रात भर

तुझ से बिछड़ कर जान-ए-जाँ आहें भरेंगे रात भर
दर्द-ए-फ़िराक़-ए-यार में रोया करेंगे रात भर

अरबाब-ए-दिल शम्अ-ए-अलम रौशन रखेंगे रात भर
बर्बादी-ई-उश्शाक का क़िस्सा कहेंगे रात भर

हम को ब-फ़ज़्ल-ए-ऐज़िदी गर इक शब-ए-क़ुरबत मिली
तो आप के रुख़्सार-ओ-लब के बोसे लेंगे रात भर

हमराह-ए-मर्ग-ए-नागहाँ सू-ए-अदम चलते हैं हम
आराम फ़रमाने को दुनिया में रुकेंगे रात भर

ہاں! نکال اٹھ کے خود اِس بندۂ نا قابل کو میرے جانے پہ ہے اصرار تری محفل کو نہ مجھے فکرِ معیشت ہے نہ اندیشۂ عشق جانے کیا خوف ہے کھاتا ہے جو م...