کیا ملے گا تمہیں یہ آنسو بہانے کے ساتھ
دشتِ خلوت میں سبھی خیمے لگانے کے ساتھ ۔
دشتِ خلوت میں سبھی خیمے لگانے کے ساتھ ۔
زندگی پھول ہے تو عشق ہے مٹّی جاناں
رنگ آۓ نہ فقط فصلِ گل آنے کے ساتھ۔
اب نئی یادیں بنانے سے بھی ڈر لگتا ہے
نا گوارا ہے بہت طول فسانے کے ساتھ ۔
حوضِ دل کو اسی دن خالی کیا جائے گا
بات جب ہوگی کسی یار پرانے کے ساتھ ۔
اتنی سی بات سمجھتا نہیں کیوں تو سمرن
کہ قدم اپنے بڑھا عین زمانے کے ساتھ ۔
क्या मिले गा तुम्हें ये आँसू बहाने के साथ
दश्त-ए-ख़ल्वत में सभी ख़ेमे लगाने के साथ
ज़िन्दगी फूल है तो इश्क़ है मिट्टी जानाँ
रंग आए न फ़क़त फ़स्ल-ए-गुल आने के साथ
अब नई यादें बनाने से भी डर लगता है
ना गवारा है बहुत तूल फ़साने के साथ
हौज़-ए-दिल को उसी दिन ख़ाली किया जाए गा
बात जब होगी किसी यार पुराने के साथ
इतनी सी बात समझता नहीं क्यूँ तू सिमरन
कि क़दम अपने बढ़ा ऐन ज़माने के साथ
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